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अमरावती ZP में ‘टेंडर सेटिंग’ का भंडाफोड़: फाइलों में खेल, 2 कर्मचारी सस्पेंड;

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अमरावती ZP में ‘टेंडर सेटिंग’ का भंडाफोड़: फाइलों में खेल, 2 कर्मचारी सस्पेंड;
धारणी के आकी गांव में हेल्थ सेंटर का ठेका बना सवाल, CEO गांधी का एक्शन | मेलघाट में कई प्रोजेक्ट रडार पर

युवा मेलघाट न्यूज नेटवर्क |
अमरावती, 20 जून 2026 : सरकारी ठेकों में पारदर्शिता का दावा करने वाली अमरावती जिला परिषद खुद ही सवालों के भंवर में फंस गई है। धारणी तहसील के दूरदराज आकी गांव में बनने वाले प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र के टेंडर में ‘सेटिंग’ की बू आने के बाद जिला परिषद ने शुक्रवार को दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है, क्योंकि लोगों का सवाल है – असली खिलाड़ी कौन?
पर्दे के पीछे क्या हुआ?
मामला सिर्फ आकी गांव का नहीं है। ढाकरमाल, कसाईखेड़ा और बारू गांव के हेल्थ सेंटर के लिए भी एक साथ टेंडर निकले थे। सूत्रों की मानें तो कुल 6-7 ठेकेदार मैदान में थे। लेकिन कागजों का खेल ऐसा चला कि तकनीकी पेंच फंसाकर चुनिंदा लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आरोप है कि जिस ठेकेदार को काम मिला, उसे बिना किसी काट-छांट के सीधे इस्टीमेट रेट पर ही ठेका थमा दिया गया। यानी न कोई नेगोशिएशन, न कोई बचत। सरकारी तिजोरी को चूना कैसे लगा, यह जांच का विषय है। CEO सत्यम गांधी ने प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सहायक लेखा अधिकारी और निविदा लिपिक को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि निविदा लिपिक का पद पहले भी विवादों में रहा है।
सवाल जो आग की तरह फैल रहे हैं

  1. मलाई किसने खाई? दो कर्मचारियों के सस्पेंशन से पब्लिक संतुष्ट नहीं। सवाल है कि फायदा किस ठेकेदार को पहुंचा और उसके तार कहां तक जुड़े हैं?
  2. सिर्फ आकी ही क्यों? मेलघाट के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर एक गांव के टेंडर में झोल है, तो बाकी 3 गांवों की फाइलें भी खुलनी चाहिए।
  3. पुराना पैटर्न? चर्चा है कि ‘नजदीकी’ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूरे जिले के निर्माण कार्यों का ऑडिट क्यों न हो?
    ”सस्पेंड कर दिया, बात खत्म’ नहीं चलेगा
    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है, “हमारे गांव में दवाखाना बनेगा, ये खुशी की बात है। लेकिन उसमें भी भ्रष्टाचार होगा तो इलाज कौन करेगा?” मेलघाट जैसे आदिवासी इलाके में एक-एक पैसा कीमती है। इसलिए मांग उठ रही है कि CEO गांधी सिर्फ सस्पेंशन तक न रुकें। सभी 4 टेंडरों की फाइलें सार्वजनिक हों और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
    अब आगे क्या?
    यह कार्रवाई ‘ट्रेलर’ मानी जा रही है। असली ‘पिक्चर’ तब सामने आएगी जब ढाकरमाल, कसाईखेड़ा और बारू की टेंडर प्रक्रिया की परतें खुलेंगी। फिलहाल जिला परिषद निर्माण विभाग बैकफुट पर है। अगर जांच का दायरा बढ़ा तो कई सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। मेलघाट की जनता की नजर अब अगले कदम पर है।
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