तेरहवीं में औषधीय पौधे बांटकर दी श्रद्धांजलि, ‘एक पेड़ दादाजी के नाम’ बना मिसाल
नगराध्यक्ष सुनील चौथमल ने पिता की स्मृति में शुरू की अनूठी पहल, एक हजार पौधे वितरित
युवा मेलघाट न्यूज | प्रतिनिधी धारणी
धारणी दि.20 जून 2026 : हिन्दू संस्कृती मे दिवंगत आत्मा को मोक्ष प्राप्त हो इसलिए अंतिम संस्कार मे तैरवही कार्यक्रम आयोजित करने की परंपरा है. समाज में तेरहवीं जैसे कार्यक्रम मे सामाजिक जबाबदारी निभाते हुये नगर पंचायत के नगराध्यक्ष सुनील चौथमल ने अपने पिता स्वर्गीय श्यामलाल फत्तूसा चौथमल की तेरहवीं पर एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल कर समाज के सामने नई लकीर खींच दी है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम: स्व.श्यामलालजी चौथमल, धारणी लाईफ फंक्शन हाॅल, 20 जून 2026
15 दिन पहले लंबी बीमारी के बाद स्वर्गीय श्यामलाल चौथमल का निधन हो गया था। उनकी तेरहवीं के कार्यक्रम में परिजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जोड़ा। इस दौरान शामिल हुए प्रत्येक व्यक्ति को औषधीय गुणों से युक्त एक हजार से अधिक पौधे वितरित किए गए। ये पौधे जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सुनीलजी चौथमल परिवार ने इस अवसर पर ‘एक पेड़ दादाजी के नाम’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने अपील की कि लोग अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में सिर्फ रस्में न निभाएं, बल्कि एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करें। उन्होंने कहा, “पिताजी हमेशा कहते थे कि पेड़-पौधे ही सच्ची धरोहर हैं। तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण और लगातार बढ़ते तापमान ने पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ दिया है। मेलघाट जैसे वन क्षेत्र में भी पेड़ों की कमी और घटती वर्षा अब चिंता का विषय बन चुकी है।” ऐसे में चौथमल परिवार के पुत्र यश और सुयोग, सुमित ने भी लोगों से अपने घर के सामने कम से कम एक पेड़ लगाने और उसे संतान की तरह पालने का आग्रह किया।
इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेरहवीं जैसे कार्यक्रम में अगर पौधे बांटे जाएं तो यह दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वरदान साबित होगी। पर्यावरणविदों ने भी इस कदम को सराहा है। उनका मानना है कि अगर समाज का हर व्यक्ति अपने किसी प्रियजन की याद में एक पेड़ लगाने का संकल्प ले ले, तो कुछ ही वर्षों में हरित क्षेत्र का दायरा काफी बढ़ सकता है। नगराध्यक्ष सुनील चौथमल की यह पहल अब ‘दिखावे से हटकर सच्ची सेवा’ का प्रतीक बन गई है।









