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मेलघाट के बच्चे आज भी शिक्षा के लिए जिला छोड़ने को मजबूर, सर्व शिक्षा अभियान पर उठे सवाल ?

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मेलघाट के बच्चे आज भी शिक्षा के लिए जिला छोड़ने को मजबूर, सर्व शिक्षा अभियान पर उठे सवाल?

युवा मेलघाट न्यूज़ | प्रतिनिधि |हरिसाल से ग्रांऊड रिपोर्ट

हरिसाल, 30 जून 2026: सरकार सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों खर्च कर रही है। मगर मेलघाट के 15 वर्ष से कम उम्र के सैकड़ों आदिवासी बच्चे आज भी पढ़ाई के लिए जिले से बाहर जा रहे हैं। सोमवार 29 जून को हरिसाल बस स्टैंड पर चार ट्रैवल्स में 200 से अधिक बच्चे मिले जिन्हें बाहर की आश्रम शालाओं में ले जाया जा रहा था। पूछताछ में पता चला कि ये सभी बच्चे मेलघाट के अलग अलग गांवों के हैं। तीन बसों में 150 से ज्यादा और चौथी बस में 60 से अधिक बच्चे थे। बच्चों ने बताया कि वे आश्रम शाला में पढ़ने जा रहे हैं पर किस शाला में जा रहे हैं यह उन्हें नहीं पता था। कई बच्चों को अपने गांव का नाम भी ठीक से मालूम नहीं था।

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बसों के साथ मौजूद शिक्षकों ने पहले जवाब देने में टालमटोल की। कभी भातकुली, कभी बोंडे तो कभी गुडे आश्रम शाला का नाम बताया गया। एक चालक ने वर्धा जिले के कारंजा तहसील की उखळी मोजा चंदेवाडी स्थित श्री कृष्णाजी मते अनुदानित आश्रम शाला का नाम लिया। एक शिक्षक ने यह भी स्वीकार किया कि वे 20 साल से मेलघाट से बच्चों को ले जा रहे हैं। इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, मेलघाट में जिला परिषद और सरकारी आश्रम शालाओं में जगह की कमी है या नहीं। दूसरा, क्या स्थानीय शालाओं में शिक्षकों की कमी और घटिया शिक्षा के कारण पालक बच्चों को बाहर भेज रहे हैं। तीसरा, जिले से बाहर गए बच्चों की सुरक्षा, भोजन और रहने की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी होगी। चौथा, क्या सिर्फ सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए बच्चों की संख्या दिखाई जा रही है। पांचवा, नाबालिग बच्चों को जिले से बाहर ले जाने के लिए पालकों की लिखित अनुमति और शिक्षा विभाग की मंजूरी ली गई या नहीं।

सर्व शिक्षा अभियान का मकसद हर बच्चे को गांव में ही शिक्षा देना है। लेकिन मेलघाट में हकीकत अलग दिख रही है। आदिवासी बच्चों को आज भी शिक्षा के लिए जिला छोड़ना पड़ रहा है। यह प्रशासन की योजना पर सवाल उठाता है। इस मामले पर आदिवासी एकात्मिक प्रकल्प अधिकारी धारणी व सहाय्यक उपजिल्हा अधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला ने कहा कि संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी लेकर तहकीकात की जाएगी और जरूरी कार्रवाई होगी। शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग से तुरंत जांच की मांग उठ रही है। मेलघाट की शालाओं में शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षा की गुणवत्ता और बाहर ले जाने वाली आश्रम शालाओं की वैधता जांचने की जरूरत है।

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दीपक मालवीया ‘दीपश्री’

शब्दों को हथियार नहीं, पुल बनाता हूं - जो जीवन, समाज और मेलघाट जैसी धरती की मानवीय संवेदनाओं को आपस में जोड़ें। मेरी कोशिश है कि हर रचना तथ्य की जमीन पर खड़ी हो और भावना की हवा से छुए। सरल भाषा में लिखता हूं, ताकि बात सीधे दिल तक जाए। Mobile No. +91 7875842661

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