बप्पा के उत्सव में धारणी में अंधेरे का उत्सव!
नगर पंचायत की कृपा से शहर में ‘ब्लैक आउट’ महोत्सव शुरू: करोड़ों की रोशनी फाइलों में कैद, सड़कों पर अंधेरा आबाद; जिम्मेदारों ने आँख पर पट्टी बांध ली
युवा मेलघाट न्यूज़ | धारणी विशेष रिपोर्ट
धारणी, गुरुवार दि.17 सप्टेंबर 2026 – धारणी नगर पंचायत ने कमाल कर दिया। पूरे महाराष्ट्र में जहां गणपति उत्सव रोशनी से जगमगा रहा है, वहीं धारणी ने नया आविष्कार किया है – बिना रोशनी का उत्सव। इसे कहते हैं विकास का नया मॉडल।
शहर के मुख्य मार्ग, जहां से हजारों गणेश भक्त, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा रोज रात में पंडालों में जाते हैं, वहां की स्ट्रीट लाइटें हड़ताल पर चली गई हैं। हड़ताल भी ऐसी कि महीनों से वापस आने का नाम नहीं ले रही। नागरिक अंधेरे में टटोल-टटोल कर चलने को मजबूर हैं। किसी के हाथ में मोबाइल की टॉर्च है, तो किसी के मन में हादसे का डर।
धारणी शहर में अंधेरा कायम है: देखिये विडियो
वाह रे योजना!
सूत्र बताते हैं कि इस अंधेरे को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये की प्रकाश योजना लाई गई थी। कागजों पर तो शहर लंदन से भी ज्यादा चमक रहा है। टेंडर पास, बिल पास, फोटो पास। बस धरातल पर पास नहीं है तो रोशनी। अब जनता पूछ रही है कि करोड़ों गए कहां? क्या तारों में, खंभों में या किसी की जेब में? सत्ता पक्ष- विपक्ष दोनों आरोप _प्रत्यारोप में जनता को उलझाकर समय पास कर रहें हैं। समस्या का निवारण कैसे करना, इससे किसी को कोई मतलब नहीं है।
सत्ता पक्ष – विपक्ष शिक्के की दोनों बाजू की तरह एक साथ: अंधेर नगरी चौपट राज वाला हाल
नागरिकों का तंज है कि यह तो वही कहावत हो गई – अंधेर नगरी चौपट राज, आधा तू खा आधा मैं खाऊं, चलो मिल बांट कर खा जाएं।
ये वही पुराना फार्मूला है – योजना बनाओ, पैसा खींचो, और जनता को अंधेरे में रखो। अपना काम बनता, भांड मे जाये जनता। धारणी की जनता अब फिल्मी गाना गुनगुनाते हुए आपस में कटाक्ष कर रही है, आते जाते हूये, सब पे नजर रखना है। नाम जनता है पर, हमें सब की ख़बर रखना है।
सुरक्षा नहीं, भगवान भरोसे
नगर पंचायत के लिए यह सिर्फ लाइट बंद होने का मामला होगा, लेकिन जनता के लिए यह जान का मामला है। अंधेरी सड़कों पर एक्सीडेंट का खतरा, अंधेरे में चोरी-छिनैती का डर रहता है। उत्सव के समय जब पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा में लगी है, तब नगर पंचायत ने अंधेरा परोस कर असामाजिक तत्वों को खुला निमंत्रण दे दिया है। विशेष बात की स्ट्रीट लाइटें बंद रहने और दुभाजक पर सुरक्षा निर्देश नहीं रहने से अनेकों एक्सिडेंट होकर लोगों को अपने हाथ पांव के साथ जान भी गंवानी पड़ी है। व्यापारीयो की दुकानें खुली रहती है,तब तक तो दुकानों के लाईट के कारण रोड पर कुछ हद तक रोशनी रहतीं हैं। पर दुकानें बंद होने के बाद राहगीरों ओर वाहनचालकों का भगवान ही मालिक है।
नागरिकों ने एक बार नहीं, बार-बार शिकायत की। लिखित में, मौखिक में। पर नगर पंचायत के कानों में जैसे रूई ठूंस दी गई है। न सुनना है, न देखना है, न बोलना है। नगर पंचायत में गांधीजी के तिन बंदरों का बेहतरीन अनुसरण हो रहा है।
सच तो यह है कि नगर पंचायत को बिजली बचाने का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना चाहिए। इतनी बचत, इतना अंधेरा तो अमावस्या के दिन भी नहीं होता जितना धारणी की मुख्य सड़कों पर रोज होता है।
गणपति बप्पा प्रकाश के देवता हैं, बुद्धि के देवता हैं। कम से कम उनके उत्सव में तो शहर को रोशन कर देते। लेकिन नहीं, यहां तो बप्पा भी देख रहे होंगे और सोच रहे होंगे कि मैं सबके घर में उजाला करता हूं, और ये लोग मेरे ही भक्तों को अंधेरे में रख रहे हैं। बप्पा घोर अंधेरे मे भी सब देख रहे है।
जनता की मांग है की , नगर पंचायत तुरंत नींद से जागे और शहर की स्ट्रीट लाइटें शुरू करे। फाइलों की रोशनी से सड़कें रोशन नहीं होती। देखना है कि नगर पंचायत कुंभकर्ण की निंद खुलतीं है या, जागकर भी सोने का ढोंग करती रहेंगी। धारणी की जनता अब फिल्मी गाना गुनगुनाते हुए आपस में कटाक्ष कर रही है, आते जाते हूये, सब पे नज़र रखना है। नाम जनता है पर, सब की खबर रखना है।
सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्री सोनोने सर (युगंधर सोनोने यांच्या निवासस्थानी धारणी येथे गौराई चे आगमन: पहा विडियो
श्री गोपाल म्हाला धारणी यांच्या घरी गौराई _गणेश विराजमान: पहा विडियो










