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पेपर लीक का काला अध्याय: “पेपर लीक: अब और नहीं, छात्रों को चाहिए समाधान”

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पेपर लीक का काला अध्याय: “पेपर लीक: अब और नहीं, छात्रों को चाहिए समाधान”

युवा मेलघाट न्यूज ब्युरो टिम
धारणी | पिछले दो साल में पेपर लीक ने देश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। जून 2024 में NEET UG के 24 लाख छात्रों का पेपर लीक हुआ और ग्रेस मार्क्स विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इसके तुरंत बाद UGC-NET का पेपर Telegram पर वायरल होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे पहले बिहार BPSC, राजस्थान REET, MP पटवारी और गुजरात GPSC जैसी दर्जनों भर्ती परीक्षाएं लीक हो चुकी थीं। हर बार CBI जांच, कुछ गिरफ्तारियां और फिर फाइल ठंडे बस्ते में। इसी बीच युवाओं का गुस्सा CJP यानी ‘Cockroach जनता पार्टी’ के बैनर तले फूटा और 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च हुआ। इस आंदोलन को लद्दाख के शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने भी समर्थन दिया और कहा कि जब सिस्टम ही भविष्य से खिलवाड़ करे तो चुप बैठना गुनाह है। PM आवास के बाहर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव के धरने और हिरासत का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन मुद्दा फिर से सत्ता बनाम विपक्ष की जंग में दब गया।

सत्ता, विपक्ष और अब CJP की मंशा पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो साल, 10 से ज्यादा बड़े लीक के बाद भी केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ कोई कठोर केंद्रीय कानून क्यों नहीं ला पाई? NTA जैसी संस्थाओं में जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई? सरकार हर बार इसे “कुछ छात्रों की गलती” कहकर टाल देती है।
वहीं विपक्ष पर भी सवाल है। छात्रों का आंदोलन जब सामाजिक लड़ाई बनकर शुरू हुआ, तो विपक्ष ने उसे अपने राजनीतिक एजेंडे में बदल दिया। संसद में बहस की जगह धरने और वीडियो को तरजीह दी गई।
लेकिन अब सबसे तीखा सवाल CJP यानी ‘Cockroach जनता पार्टी’ की मंशा पर भी उठ रहे हैं। CJP ने आंदोलन की शुरुआत तो छात्रों के नाम पर की, लेकिन 20 जुलाई के मार्च के बाद उसके बैनर, पोस्टर और सोशल मीडिया कैंपेन में पार्टी का प्रचार ज्यादा और छात्रों की ठोस मांगें कम दिखीं। आलोचकों का कहना है कि क्या CJP वाकई समाधान चाहता है या ये भी एक नया राजनीतिक दल बनने की सीढ़ी है? क्या छात्रों का दर्द CJP के लिए मुद्दा है या लॉन्चपैड? अगर CJP को छात्रों की चिंता है तो उसे सरकार पर दबाव बनाने के लिए संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह रणनीति बनानी होगी, न कि सिर्फ मार्च और वीडियो तक सीमित रहना होगा।

छात्रों का समाधान ही मुख्य मुद्दा
छात्रों को लाठी और राजनीति नहीं, एक पारदर्शी सिस्टम चाहिए। पहला, पेपर लीक को “राष्ट्रीय सुरक्षा अपराध” घोषित कर 10 साल की सजा और 1 करोड़ तक का जुर्माना तय हो। दूसरा, NTA और सभी भर्ती एजेंसियों में ब्लॉकचेन और एन्क्रिप्टेड पेपर ट्रांसफर सिस्टम लागू हो, हर स्टेज पर CCTV और थर्ड-पार्टी ऑडिट हो। तीसरा, पेपर लीक होते ही 15 दिन में दोषियों पर चार्जशीट और 6 महीने में फैसला। चौथा, NTA के चेयरमैन से लेकर सेंटर सुपरवाइजर तक की व्यक्तिगत जवाबदेही तय हो। और आखिर में, छात्रों की एक गैर-राजनीतिक राष्ट्रीय समिति बने जो हर भर्ती की निगरानी करे और सरकार को रिपोर्ट दे।

निष्कर्ष: पेपर लीक अब सिर्फ स्कैम नहीं, ये देश के युवाओं के भरोसे की हत्या है। सत्ता की नाकामी, विपक्ष की राजनीति और अब CJP की मंशा पर उठते सवालों के बीच छात्र अकेला खड़ा है। CJP का आंदोलन और सोनम वांगचुक का समर्थन बता रहे हैं कि युवा जाग चुका है। लेकिन अगर आंदोलन का नेतृत्व भी राजनीतिक मकसद से हुआ, तो छात्रों का भरोसा फिर टूटेगा। फैसला सरकार, विपक्ष और CJP तीनों को लेना है – छात्रों को समाधान देंगे या सिर्फ बयान? क्योंकि अगला मार्च अगर हुआ तो वो संसद का नहीं, लोकतंत्र के भविष्य का होगा।
दीपक मालविया ‘दीपश्री’ पत्रकार व सामाजिक नेता , संपादक
_युवा मेलघाट न्यूज़

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दीपक मालवीया ‘दीपश्री’

शब्दों को हथियार नहीं, पुल बनाता हूं - जो जीवन, समाज और मेलघाट जैसी धरती की मानवीय संवेदनाओं को आपस में जोड़ें। मेरी कोशिश है कि हर रचना तथ्य की जमीन पर खड़ी हो और भावना की हवा से छुए। सरल भाषा में लिखता हूं, ताकि बात सीधे दिल तक जाए। Mobile No. +91 7875842661

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