21 में शादी पर 1 लाख इनाम: देर से शादी रोकने की पहल या लड़कियों पर दबाव? समाज दो हिस्सों में बंटा
संपादकीय: सामाजिक / जागरूकता / रिपोर्ट
युवा मेलघाट न्यूज़ | टिम ब्यूरो
सोशल मीडिया पर चर्चित महाराष्ट्र के एक सामाजिक संगठन ने देर से हो रही शादियों और घटती जनसंख्या को लेकर जो कदम उठाया है, उसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। “लाडली बेटी सम्मान योजना” के तहत ऐलान किया गया है कि यदि कोई युवती 21 वर्ष की आयु में विवाह करती है तो उसके परिवार को 1 लाख रुपये का नगद इनाम दिया जाएगा। वहीं 24 वर्ष में विवाह करने पर 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
पहल के पीछे की वजह क्या है?
संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि उच्च शिक्षा और करियर की दौड़ में युवक-युवतियां 30 की उम्र पार करने के बाद शादी कर रहे हैं। देर से शादी के कारण संतान प्राप्ति में गंभीर चिकित्सकीय समस्याएं आ रही हैं। IVF का एक साइकिल 1.5 से 2 लाख रुपये का पड़ता है। कई दंपति 4-5 साइकिल के बाद भी माता-पिता नहीं बन पाते और 8-10 लाख रुपये खर्च कर चुके होते हैं। मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव अलग झेलना पड़ता है।
सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, देश के कई हिस्सों में विभिन्न समाजों में जनसंख्या घटने की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। कुछ संगठनों ने तो तीसरी संतान के जन्म पर 51 हजार रुपये तक का इनाम देने की घोषणा की है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 सालों में कई समुदायों की आबादी 12 लाख से घटकर 7 लाख रह गई है। गांव खाली हो रहे हैं, स्कूल बंद हो रहे हैं।
संपादकीय विश्लेषण: इनाम के दोनों पहलू
पहला पहलू – गणित सीधा है:
अगर 21 साल में शादी करने पर 1 लाख मिलता है और 30 साल के बाद IVF में 5 लाख खर्च होते हैं, तो इनाम छोटा सौदा नहीं है। ये इनाम नहीं, भविष्य के मेडिकल बिल से बचने की एडवांस स्कीम है। चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि महिलाओं के लिए गर्भधारण की जैविक रूप से सबसे उपयुक्त उम्र 20 से 30 साल के बीच है। 35 के बाद गर्भावस्था में जोखिम कई गुना बढ़ जाते हैं।
दूसरा पहलू – कीमत कौन चुका रहा है?
21 साल की उम्र में ज्यादातर लड़कियां ग्रेजुएशन भी पूरी नहीं कर पातीं। करियर शुरू होने से पहले ही शादी, ससुराल और बच्चे की जिम्मेदारी आ जाती है। यदि वैवाहिक जीवन सफल न हुआ तो उस लड़की के पास न डिग्री होगी, न नौकरी का अनुभव। 1 लाख रुपये कितने दिन चलेंगे? क्या हम इनाम देकर लड़कियों को आर्थिक रूप से कमजोर बना रहे हैं? क्या 21 साल की उम्र में लिया गया फैसला पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है?
असली बहस क्या होनी चाहिए?
‘पहले शादी या पहले करियर’ ये गलत बहस है। असली सवाल ये है कि “शादी और करियर साथ कैसे चलें?” समाज को 1 लाख रुपये बांटने की जगह ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहिए जहां 22 साल की शादीशुदा युवती भी PhD कर सके। जहां ऑफिस में क्रेच की सुविधा हो। जहां ससुराल पढ़ाई में बाधा नहीं, सहारा बने।
समस्या देर से शादी नहीं है। समस्या ये है कि हमने शादी को करियर की दुश्मन बना दिया है। लड़की को चुनना पड़ता है: या तो किताब या फिर चूल्हा। जब तक ये “या तो, या तो” वाली सोच खत्म नहीं होगी, तब तक 1 लाख क्या, 10 लाख का इनाम भी समाधान नहीं है।
समाज के सामने सवाल ?
समाज को तय करना है कि उसे 21 साल की बहू चाहिए या 30 साल की डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर बहू? अगर दोनों चाहिए तो इनाम नहीं, सोच और माहौल बदलना होगा। वरना कल को 1 लाख लेकर शादी करने वाली लड़की ही पूछेगी: “मेरे सपनों की कीमत सिर्फ 1 लाख रुपये थी?”
विशेषज्ञों की राय
समाजशास्त्रियों का मानना है कि विवाह का फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत होना चाहिए। उस पर आर्थिक इनाम या सामाजिक दबाव नहीं होना चाहिए। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि जैविक सच को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि करियर कुर्बान कर दिया जाए। संतुलन जरूरी है।















