_डिस्क्लेमर: यह लेख जनहित में प्राप्त जानकारी, स्थानीय सूत्रों और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित संपादकीय टिप्पणी है. इसका उद्देश्य संबंधित विभागों का ध्यान समस्या के समाधान की ओर आकर्षित करना है._
1935 से 1947 के बीच बना अमरावती-बुरहानपुर मार्ग मेलघाट की ‘लाइफलाइन’ है. जानकारों के मुताबिक, इस मार्ग को तत्कालीन यातायात के अनुसार लगभग 7 टन भार के लिए डिजाइन किया गया था. आज 2026 में, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उसी मार्ग पर कथित तौर पर 60-70 टन वजनी भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है. नतीजतन, धारणी-परतवाड़ा घाट पर यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं.
समस्या की जड़ में एक पेंच और है: टाइगर प्रोजेक्ट.
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक मार्ग का कुछ किलोमीटर हिस्सा मेलघाट टाइगर रिजर्व की सीमा से होकर गुजरता है. उल्लेखनीय है कि यह सड़क ब्रिटिश काल से अस्तित्व में है, जबकि टाइगर प्रोजेक्ट की अधिसूचना बाद में हुई. बताया जा रहा है कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण इस हिस्से के चौड़ीकरण या सुदृढ़ीकरण के लिए वन विभाग/टाइगर प्रोजेक्ट प्रबंधन से आवश्यक अनुमति मिलने में प्रशासनिक अड़चनें आ रही हैं.
यह ‘विकास बनाम पर्यावरण’ का क्लासिक गतिरोध प्रतीत होता है.
एक तरफ नागरिक सुविधा और सुरक्षा का प्रश्न है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार:
1. आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका रहती है.
2. स्कूली बच्चों और दैनिक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है.
3. वन क्षेत्र में रात्रि के समय वाहन खराब होने पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं व्यक्त की जाती हैं.
दूसरी तरफ वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण पहलू है. PWD के एक सेवानिवृत्त अभियंता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि, “पुरानी संरचनाओं पर लगातार ओवरलोडिंग से प्रतिकूल प्रभाव की आशंका रहती है. वहीं, भारी वाहनों के कंपन और आवाजाही से वन्यजीवों के प्राकृतिक कॉरिडोर भी प्रभावित हो सकते हैं.”
विडियो स्त्रोत : युवा मेलघाट न्यूज यूट्यूब चैनल
23/09/2024 को मेलघाट मे हुए बस हादसे का ग्राउंड विडियो देखें: धारणी परतवाडा घाट की भयावह स्थिति – 2 साल पहले युवा मेलघाट का ग्रांऊड विडियो
You Tube https://youtu.be/sz7W-oak4A0?si=Hz490rWkReNouiak
तो समाधान क्या है? प्रश्न कई विभागों से है.
1. राजस्व/PWD विभाग से: क्या ब्रिटिशकालीन इस मार्ग के लिए ‘विरासत मार्ग’ का दर्जा देकर विशेष नीति नहीं बनाई जा सकती?
2. वन विभाग/टाइगर प्रोजेक्ट से: क्या वन्यजीवों को न्यूनतम नुकसान ना पहुंचाते हुए, आधुनिक तकनीक जैसे अंडरपास/ओवरपास के साथ सीमित चौड़ीकरण पर विचार संभव नहीं है?
3. जिला प्रशासन से: क्या भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक बायपास का सर्वेक्षण प्राथमिकता पर नहीं किया जाना चाहिए?

स्थानीय लोगों की मांग है कि केंद्र व राज्य सरकार के संबंधित विभाग आपसी समन्वय से इस गतिरोध का हल निकालें.
युवा मेलघाट न्यूज़ का मत है: यह विषय ‘विकास या पर्यावरण’ का नहीं, बल्कि ‘विकास और पर्यावरण’ के संतुलन का है. 100 साल पुरानी सड़क और दशकों पुराना टाइगर प्रोजेक्ट – दोनों ही मेलघाट की पहचान हैं. किसी एक की कीमत पर दूसरे को नजरअंदाज करना जनहित में प्रतीत नहीं होता.
इस संबंध में PWD, वन विभाग तथा जिला प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया है. आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे यथावत प्रकाशित किया जाएगा. हमें उम्मीद है कि सभी संबंधित विभाग मिलकर इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालेंगे, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों सुनिश्चित हो सकें.
– संपादक, युवा मेलघाट न्यूज़













