विरोधक को छोटा करने में एनर्जी लगाने से बेहतर है, खुद को बड़ा बनाना
संपादक मंडल|युवा मेलघाट न्यूज़|अग्रलेख | सोमवार 15 जून 2026
राजनीति के मैदान में एक पुराना फॉर्मूला चलता है – “दुश्मन को कमजोर करो, आप मजबूत दिखोगे”. पर 2026 के भारत में ये फॉर्मूला एक्सपायर हो चुका है. क्योंकि जनता अब समझदार हो गई है. विरोध से विरोध ही बढ़ता है, समर्थक नहीं
जब कोई पार्टी दिन-रात सिर्फ दूसरी पार्टी को कोसती है, गाली देती है, धरना करती है, तो क्या होता है? विरोधी पार्टी के कार्यकर्ता और आक्रामक हो जाते हैं. उनका इकोसिस्टम मजबूत होता है. मीडिया में दोनों को बराबर जगह मिलती है.
नतीजा: आपने फ्री में विरोधी को पब्लिसिटी दे दी. आपके समर्थक एक भी नहीं बढ़े. हर जगह यही देखने को मिल रहा है. कितनी पार्टियां एक-दूसरे के पोस्टर फाड़ने, बयानबाजी करने में लगी रहती हैं. पर जीतता वही है जो गांव में नल पहुंचाता है, रोड बनवाता है. जनहित मे विकास के काम करता है. जनता के बिच पहुंचता है. सामान्य जनता के दुःख दर्द को कम करने में मदत करता है.
एनर्जी कहाँ लगाएं? विरोधी को छोटा करने में या खुद को बड़ा करने में? सोचिए, आपके पास 100 यूनिट एनर्जी है. ऑप्शन A: 80 यूनिट विरोधी को नीचा दिखाने में, 20 यूनिट अपने काम में. ऑप्शन B: 90 यूनिट अपने विजन, अपनी नीति, अपने काम को जनता तक पहुंचाने में, 10 यूनिट जवाब देने में. लंबी रेस कौन जीतेगा? ऑप्शन B वाला. क्योंकि जनता को “कौन बुरा है” ये सुनने से ज्यादा “मेरे लिए कौन अच्छा करेगा” ये जानने में दिलचस्पी है. राजनिती का मंत्र: “आलोचना जरूरी है, पर सिर्फ आलोचना से सरकार नहीं बनती.” विरोध करना विपक्ष का धर्म है, पर 24×7 नकारात्मकता से जनता ऊब जाती है.
समय की मांग: निजी आचरण और नीतियों को सुधारो
आज का वोटर नेता की 3 चीज देखता है: नियत, नीति, और निष्ठा. निजी आचरण: आपका करेक्टर साफ है? घोटाले से दूर हो? जनता से जुड़ते हो? नीति: आपके पास रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी के लिए रोडमैप है क्या? सिर्फ “हम उसे हटाएंगे” से काम नहीं चलेगा, “हम ये लाएंगे” बताना पड़ेगा. विस्तार का फॉर्मूला: जब आप बड़े बनोगे – विचार से, काम से, व्यवहार से – तो समर्थक खुद जुड़ेंगे. फिर पार्टी का विस्तार रुक ही नहीं सकता. ये पब्लिक हे, यह सब जानती है. जनता को पता होता है, किस नेता ने जनहित मे कोणकोणते कार्य किये है. किसी का विरोध करना ही सब कुछ नहीं होता है. जनता के लिये उसका व्हिजन भी होना चाहिए. ओर उस पर अमल भी करना चाहिए. तब हर चुनाव में उसका ग्राफ बढ़ता है. क्यों? क्योंकि उसने विरोधी को छोटा नहीं किया, खुद को बड़ा किया. निष्कर्ष: जनता है उसे उम्मीद चाहिए, समाधान चाहिए, चेहरा चाहिए जो कहे – “मैं ये करके दिखाऊंगा”. जो पार्टी ये समझ गई, वो राज करेगी. जो नहीं समझी, वो फेसबुक पर लड़ती रह जाएगी. युवा मेलघाट न्यूज का मानना है: लोकतंत्र में स्वस्थ बहस हो, पर विकास की दौड़ हो – विनाश की नहीं. _ संपादक मंडल, युवा मेलघाट न्यूज़











