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अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ शाखा धारणी का भव्य दिव्य उपक्रम. १९ अप्रैल को गौमाता की रक्त तुला’ का आयोजन

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“रक्तदान” श्रेष्ठ दान…

विश्व में पहली बार भगवान श्री परशुरामजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रक्तदान शिविर

गौमाता की रक्ततुला

विश्व में पहली बार भगवान श्री परशुरामजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ शाखा धारणी ने गौमाता की रक्त तुला का भव्य दिव्य उपक्रम का आयोजन किया है। श्रीभगवान परसुराम के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर गौमाता के सम्मान में गौमाता की रक्त तुला का भव्य दिव्य आयोजन श्री राम मंदिर धारणी यहां पर दि. १९ अप्रैल २०२६ दिन रविवार को सुबह ११:०० बजे से आयोजित किया गया है। जिसमें रक्तदाता, रक्तविर अपना अहम योगदान देंगे। अतः समस्त सम्माननीय देशप्रेमी, धर्म प्रेमी, सनातनी हिन्दू, मेलघाट क्षेत्र से प्रेम रखने वाले समस्त बन्धुओं, धर्म क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र में अग्रणी रहने वाली समस्त संगठनाओ, कार्यकर्ता, पदाधिकारीयों से जाहिर आव्हान व नम्र निवेदन है कि, आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है। आप सभी सादर आमंत्रित हैं । सभी रक्तविर, रक्तदाता गौमाता के सम्मान में रक्त तुला कार्यक्रम में अपना रक्तदान अवश्य करें। ऐसा आव्हान व निवेदन अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ शाखा धारणी ने किया है।

हमारे आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र में रक्त की परम आवश्यकता है। यह रक्त धारणी दवाखाने के ब्लड बैंक में जमा कराया जायेगा। जिससे जरुरतमंदों को जिवन दान मिल सके। देशसेवा, धर्म सेवा, समाज सेवा में अपने कर्तव्य का निर्वाहन कर सके ऐसा आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

उठो! जागो !! गौमाता, अपने माता-पिता, अपनी संस्कृति, धर्मरक्षा, देश सेवा, देशवासियों के जिवन की रक्षा के खातीर रक्तदान अवश्य करें!

धर्माचार्य पंडित सुर्यप्रकाशजी मिश्रा

जय श्री राम! जय श्री गौमाता! हमारे हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया का विषेश आध्यात्मिक महत्व है।

इसी दिन महार्षी दुर्वासा ने द्रोपती को अक्षय पात्र दिया था। इसलिए इस दिन जो भी दान किया जाता है, वह अक्षय हो जाता है….. अर्थात जिसका कभी क्षय ना हो, समाप्त न हो। इस दिन हमारे पूर्वजों का श्राद्ध दान भी होता है। जिससे उन्हें अनंत शान्ति प्राप्त होती है। श्राद्ध भगवान श्री हरि विष्णुजी के नाम से होता है। इसी दिन भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव है, जो भगवान श्री विष्णु के छठे अवतार है। जिन्होंने एक काल में धरती को अत्याचारियों से मुक्त कराया था। जिन्होंने शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा देकर सर्व सामाज को भय से मुक्त किया था। श्रीभगवान परशुराम जी के तीन अजेय शिष्य आचार्य द्रोण ब्राह्मण, पितामह भीष्म क्षत्री, अंगराज कर्ण सूत है। अपनी रंगों में बहता अपने पुर्वजों का रक्त, उनके उद्धार, जनकल्याण जरुरतमंदों को जिवनदान देने हेतु रक्तदान जरुर करे। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। पुण्य कमाकर स्वयं का उद्धार करे।

विश्व में पहली बार हो रहे भव्य दिव्य गौमाता कि रक्त तुला कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर, जनकल्याणकारी आयोजन का हिस्सा बने।

• धर्माचार्य पंडित सुर्य प्रकाश मिश्रा धारणी वाले

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