“चंद्रपुर का ‘खतरा’ मेलघाट में? विधायक बोले – हमारे लोगों की बलि नहीं चढ़ने देंगे”
परतवाड़ा प्रतिनिधी| युवा मेलघाट न्यूज़
चंद्रपुर में 4 महिलाओं की जान ले चुकी खूंखार बाघिन को अब मेलघाट में छोड़े जाने की तैयारी चल रही थी। लेकिन मेलघाट के विधायक केवलराम काले ने बीच में कूदकर इस फैसले पर ब्रेक लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
चंद्रपुर से पकड़ी गई इस बाघिन के 4 शावक हैं। 2 शावक वन विभाग ने ढूंढ निकाले हैं। इलाज के लिए बाघिन को फिलहाल परतवाड़ा के ‘ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर’ में रखा गया है। खबर मिली कि वन विभाग इसे ठीक होने के बाद मेलघाट टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में छोड़ने वाला है।
बस, खबर मिलते ही विधायक केवलराम काले 2 जून को सीधे TT सेंटर पहुंच गए। वन अधिकारियों से साफ लहजे में कहा – “मेलघाट में इस बाघिन को नहीं छोड़ेंगे। यहां पहले से ही इंसान और बाघ के बीच संघर्ष चल रहा है। ये बाघिन आई तो आग में घी डालने जैसा होगा।”
विधायक की मांग क्या है?
- इस बाघिन को मेलघाट की बजाय ज्ञानगंगा वाइल्डलाइफ सेंचुरी या नागपुर के गोरेवाड़ा में छोड़ा जाए।
- कारण: गोरेवाड़ा में इसके शावकों को भी रखा गया है। मां-बच्चों का मिलन हो जाएगा।
विधायक काले ने कहा कि मेलघाट के आदिवासी पहले ही बाघ के डर में जी रहे हैं। ऐसी ‘आदमखोर’ बाघिन यहां छोड़ना लोगों की जान से खिलवाड़ होगा।
मौके पर कौन था मौजूद?
इस दौरान यशवंत काले, शैलेश म्हाला, वन्यजीव अभ्यासक अल्केश ठाकरे और स्वीय सहायक आकाश खैरकर भी उपस्थित थे।
#मेलघाटका_सवाल: जब चंद्रपुर की समस्या मेलघाट के माथे क्यों? क्या मेलघाट के आदिवासियों की जान की कोई कीमत नहीं?











