स्मृतिशेष: मेलघाट के माजी आमदार ‘पटल्या गुरुजी’ पंचतत्व में विलीन | हजारों की मौजूदगी में धारणी मोक्षधाम में हुआ अंतिम संस्कार
युवा मेलघाट | प्रतिनिधी धारणी
धारणी दि.15 जुन 2026 | मेलघाट के लोकप्रिय माजी आमदार एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता, आदिवासी समाज की बुलंद आवाज पटल्या लंगडा मावस्कर इनका सोमवार 15 जून की सुबह निधन हो गया. धारणी स्थित हिंदू मोक्षधाम में हजारों समर्थकों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों की उपस्थिति में गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. 84 वर्ष की उम्र में वे पंचतत्व में विलीन हो गए. पेशे से शिक्षक होने के कारण मेलघाट मे उन्हे पटल्या गुरुजी के प्रसिद्ध नाम से पहचाना जाता था. शिक्षक रहते उन्होंने सन 1995 में मेलघाट विधानसभा का चूनाव में जितकर, मेलघाट में भाजपा विजयीगाथा की सुरुवात की. उनकी विजय ने मेलघाट मे भाजपा का पहला क़दम बढाया. उनके योगदान के कारण ही मेलघाट में भाजपा आज भी मजबूत है.
जनसैलाब बना अंतिम यात्रा :
दोपहर 5 बजे सिव्हिल लाईन स्थित उनके निज निवास से निकली अंतिम यात्रा में मेलघाट का जनसैलाब उमड़ पड़ा. पटल्या गुरुजी के प्रेम मे युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी अपने ‘गुरुजी’ को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आए. यात्रा में भाजपा सहित सर्वदलीय नेताओं ने कंधा दिया. मोक्षधाम पर अंतिम दर्शन,विदाई: हिंदू मोक्षधाम में अंतिम दर्शन लेकर मुखाग्नि दी गई. इस दौरान पूरा परिसर गुरुजी की यादों मे गमगीन रहा. अंतिम संस्कार मे शेकडो की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता सहीत गणमान्य नागरिक, नेता, पदाधिकारी उपस्थित थे. अचलपुर, चिखलदरा, धारणी तहसील के सरपंच, उपसरपंच और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की.
एक युग का अंत: पटल्या गुरुजी ने 1995 से 2000 तक आमदार के रुप मे मेलघाट की सेवा की. आदिवासी शिक्षा, सड़क, पानी मेलघाट के विकास के साथ आदिवासी समाज की आवाज उठाते रहे मेलघाट मे आदिवासी समाज के लिये लिए उनका संघर्ष व योगदान हमेशा याद रखा जाएगा. मेलघाट के आदिवासी समाज ने खोया अभिभावक:
पटल्या गुरुजी का जाना सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि मेलघाट के आदिवासी समाज का अभिभावक का जाना है. गरीब की झोपड़ी से लेकर मंत्रालय तक उनकी पहचान थी. उनके निधन से जो खालीपन आया है, उसे भर पाना मुश्किल है. युवा मेलघाट न्यूज परिवार दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है.









