जांच के डर से धारणी के ग्रामीण भाग में कृषी केन्द्र बंद – शहर में कारोबार चालु
युवा मेलघाट | प्रतिनिधि
04 जून 2026, धारणी
धारणी: खरीप हंगाम की बोवनी शुरू होने से ठीक पहले धारणी तालुका में बुधवार 3 जून को अजीब तस्वीर देखने को मिली। शहर में कृषि दुकानें खुली थीं, पर कुसुमकोट बु., डाबका, कळमखार समेत ग्रामीण इलाकों की अधिकतर कृषि केंद्रों के अचानक शटर डाउन कर दिए गये।
सुत्रो के मुताबिक अमरावती जिला स्तरीय भरारी पथक के तपासणी के लिए आने की खबर फैलते ही सुबह 11:30 बजे के बाद दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। इससे खाद-बीज लेने आए किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
मेलघाट का सवाल: आखिर डर किस बात का?
जब शहर की दुकानें चालू हैं तो गांव की ही क्यों बंद? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ केंद्रों पर बिना बिल, बिना परवाना और मध्यप्रदेश से लाए गए अवैध कीटनाशक बेचे जाते हैं। भरारी पथक के डर से ही शटर डाउन हुए।
कानून की नजर में ये ‘शटर डाउन’ कितना भारी?
- आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955: खरीप सीजन में बिना कारण दुकान बंद करना कालाबाजारी की श्रेणी में आता है।
- कीटनाशक अधिनियम 1968: बिना लाइसेंस दवा बेचने पर लाइसेंस रद्द + 2 साल जेल।
- बीज अधिनियम 1966: नकली/बिना प्रमाणपत्र बीज बेचना गैर-जमानती जुर्म है।
किसान को दोहरी मार: एक तो बारिश की आस, ऊपर से 40 किमी दूर धारणी शहर जाकर महंगा खाद-बीज खरीदना पड़ा। डीजल-भाड़ा अलग से।
अब आगे क्या होगा?
मेलघाट की मांग है कि कृषि विभाग संदिग्ध दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिल बुक और परवाने के साथ माल की तत्काल जांच करे। अगर गड़बड़ी मिली तो FIR दर्ज कर लाइसेंस रद्द किया जाए। खरीप हंगाम में शेतकरी की लूट बर्दाश्त नहीं होगी।
अपील: किसी भी किसान को बिना बिल के खाद-बीज मिले या ज्यादा रेट लगे तो तुरंत वीडियो बनाकर कृषी अधिकारी कार्यालय से संपर्क करें।










