मेलघाट टॉप न्यूज़ अमरावती अपडेट राष्ट्रीय अपडेट संपादकीय धर्म और संस्कृति लाइफस्टाइल जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल विदेश खेल राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

मेलघाट में बाघ पर सियासी घमासान: सत्ता पक्ष बोला- अफवाह, विपक्ष ने पुकारा आंदोलन 

---Advertisement---

अधिकारियों से बात की, शावक छोड़ने का फैसला नहीं; मेलघाटवाशियों की सुरक्षा प्रथम, अफवाह को पुर्ण विराम; अधिकृत माहीती को प्राधान्य दे _आमदार केवलराम काळे| विपक्ष का आंदोलन: 10 जून को सुसर्दा चलो | वन विभाग मौन

युवा मेळघाट न्यूज ब्युरो|

धारणी दि.8 जून : सिंदेवाही के T2 वाघिन के सावक को वैघकिय देखरेख व सुरक्षीत रखने के लिए परतवाड़ा ट्रान्झिट ट्रिटमेंट सेंटर में लाने पर मेलघाट में राजनीति गरमा गई है। जहां सत्तापक्ष ने अधिकारीयो से बातचीत करने के पश्चात इस शावक को मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प में छोड़ने का कोई भी निर्णय नही लेने की बात कर रहा है। वहीं विपक्ष नरभक्षी बाघ को राणीगावं(वाण) क्षेत्र के जंगलों में छोड़ने की तैयारी टायगर प्रोजेक्ट की है, ऐसा बोलकर आंदोलन की तयारी कर रहा है। बाघ के शावक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के आमदार के बीच पोस्टर वॉर छिड़ गया है। दोनों ओर से व्हाट्सऐप ग्रुपों पर जारी पोस्टरों से नागरिकों में भ्रम की स्थिति है।

सत्ता पक्ष का दावा:
आमदार केवळराम काळे द्वारा जारी पोस्टर में कहा गया है कि सिंदेवाही की T2 बाघिन का शावक इलाज के लिए परतवाडा लाया गया है। विधायक कार्यालय के सूत्रों ने दावा किया कि यह पोस्टर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद ही जारी किया गया है। पोस्टर में स्पष्ट लिखा है कि “इस शावक को मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प में छोड़ने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।” सूत्रों का तर्क है कि सत्ता पक्ष के आमदार को अधिकारी गलत जानकारी नहीं दे सकते, इसलिए जनता अफवाहों पर ध्यान न दे।

विपक्ष का आंदोलन: 
दूसरी ओर आमदार राजकुमार पटेल के पोस्टर में आरोप है कि चंद्रपुर में चार महिलाओं पर हमला करने वाले “नरभक्षी बाघ” को परतवाडा लाया गया है और उसे राणीगांव-वाण के जंगल में छोड़ने की तैयारी है। इसके विरोध में आंदोलन का ऐलान किया गया है।

वन विभाग की चुप्पी: 
दोनों विधायकों के विरोधाभासी दावों के बीच मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प ने कोई लिखित बयान जारी नहीं किया। क्षेत्र संचालक से संपर्क करने पर संपर्क नही हो सका है।

पृष्ठभूमि: चंद्रपुर जिले में मई 2025 में एक दिन में तीन महिलाओं समेत 2025-26 में 29+ लोगों की बाघ के हमलों में मौत हो चुकी है। इसी कारण मेलघाट में दहशत है।

बाघ गया तेल लेने, सियासत अपनी दहाड़ रही 

मेलघाट का बाघ अब पिंजरे में नहीं, पोस्टरों में कैद है। एक पोस्टर कहता है “अफवाह है”, दूसरा कहता है “आंदोलन है”। सत्ता पक्ष का तर्क वजनदार है – अधिकारी उनसे झूठ नहीं बोल सकता। पर सवाल ये है कि अगर अधिकारियों ने “नहीं छोड़ेंगे” कह दिया, तो विपक्ष “छोड़ने की तैयारी” का आरोप किस आधार पर लगा रहा?

असली खेल अफवाह का नहीं, क्रेडिट का है। सत्ता पक्ष जनता को बताना चाहता है – “हमने बाघ रुकवा दिया”। विपक्ष बताना चाहता है – “हमने बाघ को घुसने से रोका”। बीच में पिस रहा है वो आदिवासी जो रोज महुआ बीनने जंगल जाता है। उसे पोस्टर नहीं, गारंटी चाहिए कि कल वो जिंदा लौटेगा।

वन विभाग का मौन सबसे महंगा पड़ रहा है। एक प्रेस नोट, एक लाइन का स्पष्टीकरण – “परतवाडा का शावक इलाज के बाद कहां जाएगा” – सारी सियासत खत्म कर सकता है। पर साहब बोलेंगे नहीं, क्योंकि बोलने से जिम्मेदारी आती है।

2025 में 16 मौतें, 2026 में 13 मौतें चंद्रपुर में हो चुकीं। बाघ-मानव संघर्ष का हल पोस्टर से नहीं, पॉलिसी से निकलेगा। कोर एरिया बढ़ाओ, बफर में गश्त बढ़ाओ, ग्रामीणों को वैकल्पिक रोजगार दो। पर ये काम मुश्किल है। आसान है पोस्टर छपवाना और आंदोलन बुलाना। आंदोलन होंगे। भाषण होंगे। तालियां बजेंगी। और शाम को फिर वही कहानी – गरीब आदिवासी, घना जंगल, और अनिश्चित मौत। बाघ पर सियासत बंद हो, बाघ की समस्या पर बात शुरू हो। वरना एक दिन न जंगल बचेगा, न जंगल की सियासत।

---Advertisement---
---Advertisement---

दीपक मालवीया ‘दीपश्री’

शब्दों को हथियार नहीं, पुल बनाता हूं - जो जीवन, समाज और मेलघाट जैसी धरती की मानवीय संवेदनाओं को आपस में जोड़ें। मेरी कोशिश है कि हर रचना तथ्य की जमीन पर खड़ी हो और भावना की हवा से छुए। सरल भाषा में लिखता हूं, ताकि बात सीधे दिल तक जाए। Mobile No. +91 7875842661

Join WhatsApp

Join Now

Join Youtube

Join Now

Leave a Comment